बुधवार, 30 जनवरी 2008

आज गांन्हीबाबा का पुन्नतीथी न हउवै, त तनी ईहो सुनले जा

बड़ी-बड़ी कोठिया सजाए पूंजीपतिया
कि दुखिया के रोटिया चोराए-चोराए
अपने महलिया में करे उजियरवा
कि बिजरी के रडवा जराए-जराए

कत्तो बने भिटवा कतहूं बने गढ़ई
कत्तो बने महल कतहुं बने मड़ई
मटिया के दियना तूहीं त बुझवाया
कि सोनवा के बेनवा डोलाए-डोलाए

मिलया में खून जरे खेत में पसीनवा
तबहुं न मिलिहैं पेट भर दनवा
अपनी गोदमिया तूहीं त भरवाया
कि बड़े-बड़े बोरवा सियाए-सिआए

राम अउर रहीम के ताके पे धइके लाला
खोई के ईमनवा बटोरे धन काला
देसवा के हमरे तू लूट के खाया
कई गुना दमवा बढ़ाए-बढ़ाए

जे त करे काम, छोट कहलावे
ऊ बा बड़ मन जे जतन बतावे
दस के सासनवा नब्बे पे करवावे
इहे परिपाटी चलाए-चलाए

जुड़ होई छतिया तनिक दऊ बरसा
अब त महलिया में खुलिहैं मदरसा
दुखिया के लरिका पढ़े बदे जइहैं
छोट-बड़ टोलिया बनाए-बनाए

बिनु काटे भिंटवा, गड़हिया न पटिहैं
अपने खुसी से धन-धरती न बटिहैं
जनता केतलवा तिजोरिया पे लगिहैं
कि महल में बजना बजाए-बजाए

.....गांन्ही जी के चेलवा लूटत बांटैं सबके
चोरवन से हथवा मिलाए-मिलाए
देसवा अमेरिका के हथवा में बन्हक
रखि देहलें नेतवा ढुकाए-ढुकाए
अब रजघटवा पै गावै लैं भजनिया
गांन्ही नाई चेहरा झुकाए-झुकाए
...रघुपति राघव राजाराम
पतना न पावैं सीताराम..सित्ताराम...सित्ताराम

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