रविवार, 2 मार्च 2008

कबीर सारा-रा-रा-रारा-रारा-रा-रारा....



डाल के ऊपर कउवा हौ, कउवा ऊपर कनकउवा

ओकरे उप्पर छउवा ठाकुर बइठल खायं ठोकउवा

कबीर सारा-रा-रा-रारा-रारा-रा-रारा....


दानापुर दरियाव किनारा, गोलघर निशानी
लाट साहेब ने किला बनाया, क्या गंगा जल पानी


जोगी जी सार रा रा.........


दिल्ली देखो ढाका देखो, शहर देखो कलकत्ता।
एक पेड़ तो ऐसा देखो, फर के ऊपर पत्ता,
जोगी जी सार रा रा............


कौन काठ के बनी खड़ौआ, कौन यार बनाया है,
कौन गुरु की सेवा कीन्हो, कौन खड़ौआ पाया,
चनन काठ के बनी खड़ौआ, बढ़यी यार बनाया हो,
हम गुरु की सेवा कीन्हा, हम खड़ौआ पाया है,
जोगी जी सारा रा रा............


5 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

चिट्ठा मैं लिख डालूं, बाकि एक टिप्पिय्या हो..
जोगी जी सारा रा रा

--वाह वाह!!! हम आ गये टिपियाने.

azdak ने कहा…

हुरारारा? बोल सकते हैं कि नहीं?

Ashish Maharishi ने कहा…

maajaa aa gyaa boss

राज भाटिय़ा ने कहा…

क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्कुछ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ भी नहीईईईईईईईईईईईईईई

अजित वडनेरकर ने कहा…

वाह , मज़ा आया ....जोगी जी