सोमवार, 3 मार्च 2008

ऐ कुतिया



तेरी पूंछ इत्ती-सी,
तेरी टांगें इतनी छपक-छरहरी,
तेरी भूंक मीठी-मीठी,
तेरी आंखें गुस्साई हिरनी जैसी
ऐ कुतिया!

तेरी चाल कैट वॉक की,
तेरी मस्तियां पूंजी से पुरजोर,
तेरी चौकदारी अमेरिका-जापान तक,
तेरे कान कितने चौकन्ने,
और तेरी खाल इतनी मोटी क्यों है
ऐ कुतिया!

तेरे आजू-बाजू इतनी धन-दौलत,
तेरे इतने घर-मकान,
तेरे इतने नौकर-चाकर, नाती-पनाती,
बारहो मास कोई राजधानी, कोई पहाड़ों की सैर पर,
तू शेयरों की रानी,
दलालों की दलाल और कुत्तों की कहारन
ऐ कुतिया!

तेरे नाम पर गालियों के मुहावरे हजार,
तेरे गुस्से में बर्बादियों के सात समंदरों की दहाड़,
तेरी नीद में तरह-तरह के किन्नर नरेश,
तेरी सुबहें लहलहाती हुईं,
तेरी रातें कहकहों और ठहाकों से सराबोर,
तेरी चमड़ी इत्ती सुघर-सलोनी
लेकिन तेरा मन
ऐ कुतिया!

कुतिया कहने पर गुस्सा क्यों आता है तुझे,
कुतिया का मतलब गाली क्यों होता है,
कुतिया का दूध पीने वाली औलादें
इतनी खूंख्वार क्यों होती हैं,
अब तुझसे क्या पूछें
और भी क्या-क्या कहें....
ऐ कुतिया!

(तू खुद में एक सवाल है)
(तू खुद में एक जाति है)
(तेरी जाति की हजारों-लाखों दुनिया भर में)
(ऐ कुतिया!)

(भौंकती रह, भौंकती रह)
(भौंकना ही तेरा सौंदर्यशास्त्र है)
(भौंकना तेरा पेशा है)
(भौंकने से परहेज करते ही तू मर जाएगी)
(ऐ कुतिया!)

2 टिप्‍पणियां:

Shiv Kumar Mishra ने कहा…

वाह!

जोगीरा स र र र र र र र रा रा रा रा...बाह भाई बाह...बाह खेलाड़ी बाह...

राज भाटिय़ा ने कहा…

रहीम माआआआम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म
मीराआर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्वाआआआआआआअ बाहई