शुक्रवार, 18 जनवरी 2008

अ़ँडु़आ बैल बंहेड़ु़आ...तान भोजपुरिया

अ़ँडु़आ बैल बंहेड़ु़आ पूत, खा ले बेटा कहीं सुत।
अइली ना गइली फलांने बो कहइलीं।
- अन्हरा सियार के पीपरै मेवा
अपना बिनु सपना, गोतिया के धन कलपना।
-अपना मने सजनी, के गाँव के लोग कहैं पदनी
-अपना हारल मेहरी के मारल।
- अब्बर क मेहरारू गाँव भर के भउजी
-अहीर बहीर बन बइर के लासा, अहीर पदलेस भइल तमासा।
-आँख के आन्हर गांठ के पुरा।
- आँख एक्को ना, कजरौटा बारह गो
-आँख ना दीदा मांगे मलीदा।
- आइल थोर दिन गइल ढेर दिन।
-आगे नाथ ना पा पगहा।
-आन्हर कुकुर बतासे भोंके ।
- आन्ही के आगे बेना के बतास! (बेनाउपंखा, बतासउहवा)
-आपन निकाल मोर नावे दे।
-आपन आंखि न देखै, दूसरे क ढेंढ़रा निहारै।
-बाबू गुड़ खाई, आपन कान छेदाई।
- इसर निकलस दरिदर पइसस।
-उखड़े बाल नहीं, नाम बरिआर सिंह।
-उपास भला कि मेहरी के जूठ भला !
-एक आन्हर एक कोढ़ी, भले राम मिलवले जोड़ी।
-एक ट्का के मुर्गी नव ट्का के मसाला।
- एक त गउरा अपने गोर, दूसर लहली कमरी ओढ़।
-एक त छ्उँड़ी नचनी, गोड़ में परल बजनी, अउरी हो गइल नचनी।
- एक क लकड़ी, नब्बे खर्च।
-एक हाथ के ककरी, नौ हाथ के बिआ।
-कमाय धोती वाला खाय टोपी वाला।
-कहले से धोबी गदहवा पर ना चढ़े।
- कहाँ राजा भोज कहाँ भोजवा तेली!
- काठ के हँडिया एके बेर चढ़ै ले।
-काम के ना काज के नौ सेर अनाज के।
-बकरा जान संग जाए खवइया के सवादै ना।
-खेत च गदहा मार खाए धोबी।
-गइल भइंस पानी में।
-गया मरद जो खाय खटाई, गई नारि जो खाय मिठाई।
-घर-घर देखा एके लेखा।
-घीव देत घोर नरिया।
-पर लैं राम कुकर के पालै ठेलठाल के कइलैं खाले।

1 टिप्पणी:

Joshim ने कहा…

ऊना मासी धम, बाप पढै न हम [:-)]- manish [ बहुँन नीक लाग]