सच-सच कहीं त हिंदुस्तान का मातृभाषा हिंदी ह अउर हिंदी का मातृभाषा भोजपुरी। उत्तर प्रदेश अउर बिहार के हिंदी पट्टी में भोजपुरी क साहित्यिक खजाना देश के कौनो भी क्षेत्रीय भाषा कोष से बहुत ही अधिक भरल-पुरल हउवै। एकरे इलाका से अइसन-अइसन लिक्खाड़ लोग हिंदी जगत के मिललैं, जिनकर नांव आजौ देश-दुनिया में बड़े आदर से लेहल जाला। भिखारी ठाकुर त फिल्मी पताका फहरौलही रहलैं आ आज तक ओनकर नाम लेत ही मन में माटी की धुन बजै लगैले, हिंदी साहित्य क अकाश आज भी जिनके नाम से जगमगात हउवै, उनही लोगन में हउवैं पंडित रामचंदर शुकुल, सूरजकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वरमा, जयशंकर प्रसाद, हजारी प्रसाद द्रिवेदी, पं.श्याम नरायन पांडे हल्दी घाटी वाले, रामधारी सिंह दिनकर, सुदामा तिवारी धूमिल, हरवंश राय बच्चन, अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध, अउर आज कल डा.नामवर सिंह, डा.काशीनाथ सिंह,........केतना गिनाईं। फिल्मी दुनिया में त मनोज तिवारी धूम मचउलही हउवैं। एक जमाने में रमई काका, कैलाश गौतम, हरीभैया यानी हरेराम द्विववेदी, चंद्रशेखर मिसिर, डा.श्याम तिवारी, चकाचक बनारसी, भैया जी बनारसी, श्रीकृष्ण तिवारी, भोलानाथ गहमरी, रूपनारायण तिवारी, क्षेम जी, तिरलोकी, और दूर-दूर तक गूंजै वाला नाम मोती बीए। अउर केतना-केतना गिनाईं। इहां नांव गिनावे का मकसद ना हउवै। बस एतना बताइ देईं कि भोजपुरी क खजाना केतना भरल-पूरल हउवै। भोजपुरी का झंडा आज भी हिंदुस्तान के हरकोने में ही नहीं , दुनिया भर में मारिशस से अमेरिका-ब्रिटेन तक लहरात हउवै। हजारों भाई बहन एही इलाके से निकलि के जाने कहां-कहां तक बिराजि गइलें। अपने देश में त बड़े-बड़े नेता-परेता एहि इलाके से भइलैं ही, भारत के बाहर भी राष्ट्रपति, परधानमंत्री इहा के लोग होइ चुकल बाटैं। मारिशस त भोजरी का भंडार ही कहल जाला।
त अबहिन बस ऐतने जान-पहचानि के लिए।
आगे एहि ब्लॉग पर आप लोगन क कृपा बनल रहलि त बहुत कुछ पढ़ै-सुनै के मिली। अपने सभी भोजपुरी भाइन से गुहार ह कि अगर ऊ कुछ लिखे-पढ़ै के लिए गावै-सुनावै के लिए एहि ब्लाग का जरूरत महसूस करिहैं त हम सीना खोलि के उनके सामने हाजिर मिलब। आखिर में आप सब ई जानि लेईं कि जहां तक भोज में पूरी चलैले, उहां तक भोजपुरी का राजपाट हउवै। शायद एही से एकर नाम भोजपुरी परल।
सिर झुकाइ कै सब भोजपुरी भाई-बहिन लोगन के राम-राम।
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3 टिप्पणियां:
bhaiya bhojpuri blog se bhojpuriya maati k mahak basal ba . man kush ho gail padh ke
भइया ई तो बढिया बात हौ लेकिन खाली आपने क्षेत्र के बड़ा बड़ा नाम गिनावै के अलावा भी भोजपुरी पट्टी में बहुत कुछ हउवै। तनी ओहू कुल पे कलम चलइबा तो बढ़िया रही। अउर देस परदेश में रहै वाले लोगन के भी अपने इलाका के अच्छी खासी जानकारी मिल जाई। प्रयास बहुत बढ़िया बाय। लिखत रहा ।
छछनी छछन्न करै, टाटी-बेड़ा बन्न करै पढ़ के मज़ा आ गईल। राउर तारीफ से मन खुश भेल.......
ऐसहीं बढावा दिहल करीं .......
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